फिलीपींस में मरी हुई व्हेल के पेट में से निकला 40 किलो प्लास्टिक

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आज दुनिया में किसी से भी व्यक्ति से यह सवाल किया जाए की दुनिया में सबसे बड़ा खतरा क्या है, सबकी अलग राय आई गी कोई कहेगा आतंगवाद, वर्ल्ड वॉर, नार्थ कोरिआ मिली जुली प्रतिक्रिया आएगी। लेकिन ऐसा नहीं है आज विश्व को सबसे बड़ा खतरा ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) से है। इस विषय पर आज पूरी दुनिया बात कर रही ह, और इस समस्या से निपटने की त्यारी कर रही है। लेकिन यह सिर्फ चर्चा बन कर रह जाती है, इस समस्या पर कड़े कदम नहीं उठाए जाते। ग्लोबल वार्मिंग का सीधा संबंद प्लास्टिक से होता है। विश्व के कई बड़े देश इसे बंद करने की बात तो करते है, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता।

फिलीपींस से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई है जो प्रेसन करने वाली है। दरसल फिलीपींस में पोलोथिन की वजह से एक व्हेल की मोत हो गई। जब उस व्हेल  को पानी से बहार निकाला गया। जिसके बाद उसकी जांच की गई, तो सामने आया की व्हेल  की मोत गेस्ट्रिक शौक की वजह से हुई। व्हेल  के पेट में से 40 किलो प्लास्टिक निकला। फिलीपींस में D’ Bone Collector नाम का एक संग्रहालय है। यह संस्था मरे हुए जानवरो कंकाल  संग्रहालय में रखते है। इन को समुंद्र में मरी हुई व्हेल मिली, व्हेल को पानी से बहार निकल कर उसकी ऑटोप्सी करी।  D’ Bone Collectorसंग्रहालय ने इस पूरी घटना की जानकारी अपने फेसबुक पर दी।


एक काम उम्र की व्हेल मछली की बॉडी 16 मार्च 2019 को रिकवर की गई। व्हेल मछली के पेट से 40 किलो प्लास्टिक बैग, 16 चावल के कट्टे, कई शॉपिंग बैग आदि निकले। पूरी जानकारी आने वाले कुछ दिनों में दे दी जाएगी, इस व्हल के पेट में जितनी प्लास्टिक निकला है, इतना प्लास्टिक पहले किसी व्हेल के पेट से नहीं निकला। यह बहुत वाहियाद बात है। सरकार को इसके खिलाफ कुछ करना चाइये। उनके खिलाफ सख्त करवाई होनी चाहिए जो समुंद्र को कूड़ेदान समझते है।

मरीन बिओलॉजिस्ट ने कहा की मैं तकरीबन 10 साल से मरी हुई व्हेल और डॉल्फिंस की जांच कर रहा हूँ।  जितनी भी मछलियों की मोत हुई है उनमे से 57 व्हेल मछली की मौत सिर्फ प्लास्टिक की वजह से हुई है। ज्यादा तर जो प्लास्टिक मिला वह सिंगल यूज़ वाला था, जिसे ज्यादा इस्तेमाल साउथ ईस्ट एशिया में ही होता है। हर साल थाईलैंड में 300 से ज्यादा मछलियों की जान प्लास्टिक के वजह से जाती है। विश्व को इस समस्या को गंभीरता से लेना होगा और कड़े कदम उठाने होंगे।

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