भारत को अमेरिका की ओर से मिला आर्थिक झटका, GPS सुविधा छीन सकता है

source by ; HuffPost

बताया जा रहा है, की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ GPS (जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस) को खतम करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी ट्रंप ने अमेरिका की संसद दे दी है। इस लिस्ट में भारत के अलावा तुर्की भी इसमें शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत और तुर्की से कारोबारी संबंध तोड़ रह है। यह जानकारी सोमवार को भारत को दी गई।ट्रंप ने बोलै की मैंने ये फैसला इसलिए उठाया है, क्योंकि अमेरिका तथा भारत सरकार के बीच मजबूत संबंध होने के बावजूद मैंने यह देखा है, कि भारत ने अमेरिका को यह विश्वास नहीं दिया है। की वह अपने भारतीय बाजारों में उसकी उचित पहुंच प्रदान करेगा। इसके बाद बताया की अमेरिका ने तुर्की के साथ आर्थिक विकास के आधार पर तुर्की के कर मुक्त देश के दर्जे को भी समाप्त कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत पर यह आरोप लगाया की भारत व्यापर पर बहुत अधिक षुल्क लगाता है।अपनी बात में कहा की वह आपस में बराबरी कर रखे या फिर कम कर रखा जाये जिससे दोनों को मुनाफा हो सकें।

आइये जानते है क्या होता है GSP ?

GPS (जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस) इस एक अमेरिकी ट्रेड प्रोग्राम है। इसके अंतर्गत अमेरिका विकासशील देशो में आर्थिक वृद्धि हो सके, इसके चलते अमेरिका बिना कोई टेक्स के चीजों को  खरीदता है। जिससे विकासशील देशो में आर्थिक वृद्धि हो सके। अमेरिका ने विश्व के 129 विकासशील देशो को यह सुविधा प्रदान कर रखी है। इस ट्रेड प्रोग्राम में 4800 प्रोडक्ट की खरीददारी की जाती है। इसमें भारत के बहुत जाने माने प्रोडक्ट्स है। इस व्यवस्था की सुरवात ट्रेड एक्ट 1974 के तहत 1 जनवरी 1976 की थी। इसमें एक कमेठी का गठन किया गया था।

मेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस फैसले पर हस्ताक्षर करने के बाद 60 दिन का अधिसूचना दे दिया गया था। यह एक अंतर्राष्टीय प्रक्रिया है। जिसे किसी  भी देश को पहले बताना होता है, अपनी मर्जी से ये फैसला नहीं लिया जा सकता। इससे भारतीय बजार बहुत प्रभावित होगा। क्युकी भारत के लगभग 2 हजार प्रोडक्ट्स है। इससे यह सभी प्रोडक्ट्स प्रभावित होंगे। इनमें ऑटो पार्ट्स, इंडस्ट्रियल वॉल्व और टेक्सटाइल मैटीरियल प्रमुख हैं। डोनाल्ड ट्रंप चाए तो अपना फैसला बदल सकते है। लेकिन इसके लिए भारत को डोनाल्ड ट्रंप की चिंताओं का हल निकालना होगा। देखते है की भारत सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया करती है।

भारत पहला ऐसा देश था जिससे GSP का सबसे अधिक फायदा हुआ था। भारत से अमेरिका ने 5.7 बिलियन डॉलर का आयात बिना किसी टैक्स के किया था। तुर्की इस संखला में पाचवे स्थान पर है। इस निर्णय पर अमेरिका ने पिछले साल ही यह फैसला लिया था की भारत और तुर्की को यह सुविधा देनी बंद कर देनी चाइये। अमेरिका का कहना है की भारत का अब विकाशशील देश की संखला में नहीं रखा जा सकता। इसका प्रभाव बीजेपी पर भी देखा जा सके गा।

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