तानाशाह किम जोंग “उत्तर कोरिया” को लेनी पड़ी मदद, इस देश ने 50 हज़ार टन चावल की सहायता करी

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उत्तर कोरिया के अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग पड़े होने के बावजूद दक्षिण कोरिया अपने पड़ोसी मुल्क को मानवीय राहत सायता देने के लिए त्यार हो गया है। आपको बता दे की इस समय उत्तर कोरिया की स्थिति भेहद नाजुक बनी हुई है, दरसल उत्तर कोरिया भयंकर सूखे की मार झेल रहा है। दूसरा कारण यह है की किम जोंग तानाशाह के लगातार मिसाइल परीक्षण के कारण उत्तर कोरिया को आर्थिक प्रतिबंधों की मार को झेलना पड़ रहा है, जिसके चलते वहां खाद्यान्न की कमी का संकट पैदा हो गया है।

लेकिन अब कुछ ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है , दरसल दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय की और से जानकारी दी गई है की वह “जल्द से जल्द” अपने पड़ोसी मुल्क उत्तर कोरिया को 50 हज़ार टन चावल की सहायता प्रदान करेगा। आपको बता दे की संयुक्त राष्ट्र का विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) मानवीय राहत पहुंचाने की इस पूरी प्रक्रिया की देख-रेख करेगी।दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री किम इयोन चुल का कहना है की “उत्तर कोरिया के लोगों की खराब स्थिति को दक्षिण कोरिया की सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती।”

इस पहले भी उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया साल 2010 में मानवीय मदद ली थी। 2010 में दक्षिण कोरिया की और से उत्तर कोरिया को पांच हज़ार टन चावल की सायता प्रदान की थी, यह दूसरा मौका है की उत्तर कोरिया में संकट पैदा हुआ है।

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कुछ समय से देखा गया है की दोनों देशो के बिच रिश्ते अच्छे हुए है। आपकी जानकारी के लिए बता दे की हाल ही में दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम के लिए 80 लाख डॉलर का दान में दिए थे। इस कार्यक्रम के तहत उत्तर कोरिया में महिलाओं और बच्चों को पोषक खाद्य और स्वास्थ्य सुविधा प्रदान कराना था। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट मुताबिक इस बात की पहले ही घोषणा कर दी गई थी, की “उत्तर कोरिया को जल्द से जल्द खाद्यान्न के रूप में मानवीय मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। रिपोट में यह भी जानकारी दी गई थी की उत्तर कोरिया में बीते 37 सालों का सबसे भयंकर सूखा पड़ा है। जिसका सीधे तोर पर असर कृषि पर पड़ा है। उत्तर कोरिया की 70 प्रतिशत आबादी अब भी राशन पर निर्भर है। ऐसे में देश को इसी प्रकार की मददत की आवयश्कता थी। देश और दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए हमारे साथ बने रहे।

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