सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसान ने सल्फास खाकर दी जान, कृषि कानूनों पर सरकार के रुख से थे नाराज

the economic times
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केंद्र के नए क्रषि कानून के खिलाफ किसान करीब 45 दिन से राष्ट्रीय राजधानी की सीमओं पर आन्दोलन कर रहे है. किसान सरकार द्वारा लिए गए तीनो नए क्रषि कानूनों को वापस लेने के लिए अड़े हुए है. क्रषि कानूनों को लेकर किसान और सरकार क्र बीच जारी गतिरोध को ख़तम करने के लिए आठवे डोर की बातचीत हुई है.

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और आपको बता दे के इस बातचीत में भी कोई फैसला नहीं निकला है. किसान संगठन क्रषि कानून को वापस लेने के अलावा किसि ओर दुसरे फैसले को मानने को तेयार नहीं है. कड़ाके की ठंड के बीच लड़ रहे किसानो का आन्दोलन बढ़ता ही जा रहा है. ठंड के बावजूद हजारो किसान 26 नवम्बर से सडको पर दते हुए है. राजधानी दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे हुए है. किसानो द्वारा हो रहे इस आन्दोलन में अब तक करीब 60 किसनो ने दम तोड़ दिया है. और इसी के बीच कंग्रेश सरकार ने कहा के मोदी सरकार हमारे किसानो को थकाने और झुकाने की साजिस कर रही है.

बैठक में मोजूद एक नेता ने बताया की जब सरकार ने कानून वापस लेने से इनकार किया तो किसान नेताओ में बेठक में मोन धारण करने का फैसला किया. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सोमवार को सुनवाई करेंगी. यह सुनवाई बहोत अहम् होने वाली है. किसान संगठन और सरकार दोनो की ही निगाहें इस सुनवाई पर टिक्की है. सरकार सिर्फ संसोधन पर बात करना चाहती है, जबकि हम कानून वापसी चाहते है. अब 15 जनवरी को फिर बातचीत होगी. किसानों ने कहा जब तक सरकार हमारी बात नहीं मानती तब तक आन्दोलन ख़तम करने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

किसान नेताओ ने सरकार से नए क्रषि क़ानूनों को वापस लेने का आग्रह किय है. ताकि वह बिना किसी सिकायत के अपने-अपने घर लोट सके और अपने इस आन्दोलन को यही पर ख़त्म कर दे. लेकिन सरकार का कहना है के फ़िलहाल क्रषि कानूनों को वापस लेना संभव नहीं है. केंद्र के क्रषि मंत्री नरेंद्र सिंग तोमर ने किसानो से हुई मुलाकात के बाद कहा के आज किसान यूनियन के साथ तीनो क्रषि कानूनों पर चर्चा होती रही परन्तु कोई समाधान नहीं निकला. सरकार की तरफ से कहा गया के कानून को वापस लेने के अलावा कोई और विकल्प दिया जाये लेकिन कोई विकल्प नहीं मिला.

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उन्होंने कहा के सरकार ने बार-बार कहा कि किसान यूनियन अगर कानून वापिस लेने की अलावा कोई और विकल्प देगी तो हम बात करने को तेयार है. आन्दोलन कर रहे लोगो का मानना है की इन कानूनों को वापिस लिया जाये.

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