Chakka Jam News: Farmers Protest

चक्का जाम: लाल किला-जामा मस्जिद सहित आठ मेट्रो स्टेशन बंद

Chakka Jam News
The Hindu

Chakka Jam News– नए क्रषि कानूनों के खिलाफ चल रहे करीब 2 महीनो से जायदा इस किसान आन्दोलन में किसान सनिवार को चक्का जाम करेंगे. किसी तरह की भी अनहोनी न हो इसलिए प्रशासन भी तेयारियो में जुटा हुआ है. चक्का जाम दोपहर 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक रहेगा. दिल्ली पुलिस सहर में सारी अवेध एन्ट्री को रोकेगी. साथ ही बसों को भी रोका जायेगा. इमरजेंसी गाडियों को आने-जाने की छुट दी गयी है. जिन बोर्डर पर किसान आंदोलन चल रहा है. वहा पुलिस ने पहले से ही सुरक्षा बढ़ा दी है. और इन बॉर्डर को पूरी तरह से सील कर दिया गया है.

और बाकि के बॉर्डर पर भी आज कड़ी निगरानी राखी जाएगी. चक्का जाम को लेकर सुकरवार को बैठक का दोर जरी रहा. बैठक में किसान नेताओ ने खा की 26 जनवरी को ट्रेक्टर परेड के दोरान दिल्ली में जो किसान गिरफ्तार किये गये थे उनकी रिहाई किसानो के खिलाफ मामले और किसान विरोधी कानून रद्द करने की मांग को लेकर चक्का जाम कर प्रदर्सन किया जायेगा. दिल्ली के बारे में पूछे जाने पर टिकेत ने कहा के दिल्ली में तो पहले से चक्का जाम है. इसलिए दिल्ली को इस चक्का जाम में सामिल नहीं किया जायेगा.

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The Economic Times

हिंशा के डर से इन जगहों पर चक्का जाम टालने के सवाल पर टिकेत ने कहा की हमारे कर्यक्रम में कही भी हिंशा नहीं होती. कई जगह पर हुई महापंचायते इसका प्रमाण है. उन्होंने आगे कहा के हम सरकार से बात करना चाहते है, सरकार कहा पर है, वह हमे मिल नहीं रही. कांग्रेश सहित लगभग सभी विपक्षी पार्टीयो ने इस चक्का जाम का समर्थन किया है. इसका असर दिल्ली में नहीं होगा फिर भी 50 हजार सुरक्षा कर्मियों को तेनात किया गया है. इसके अलावा 12 मेट्रो स्टेशन को अलर्ट पर रखा गया है. किसानो का कहना है की दिल्ली, उतराखंड और उत्तर प्रदेश में चक्का जाम नहीं होगा. किसान आन्दोलन की आगे की रणनीति को लेकर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकेत और भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्स बलबीर सिंह राजेवाल के बिच आज गाजीपुर बॉर्डर पर हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है.

नये क्रषि कानूनों को रद्द कराने पर अड़े किसान इस मुद्दे पर सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई का एलान कर चुक्के है. 26 जनवरी को हुई ट्रेक्टर परेड में हिंशा के बाद आन्दोलन कर रहे किसानो की संख्या में पिछले दिनों में कमी आई थी. लेकिन भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकेत के भावुक होने के बाद एक बार फिर से आन्दोलन को बड़ी संख्या में समर्थन मिलने लगा है.

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