दीपिका पादुकोन की नई फिल्म ‘छपाक’ का फ़र्स्ट लुक हुआ रिलीज़

Image Source; Jansatta

छपाक यह फ़िल्म मेगा गुलज़ार की अगली फिल्म का नाम है, इसमें दीपिका पादुकोन अहम भूमिका निभा रही है। आप जानना चाहेंगे की दीपिका इस फिल्म में किसी लग रही है और उनके लुक में क्या खाश बातें है। फिल्म में दीपिका भेहद खास अंदाज़ में नज़र आरही है। हम आपको बता दे की इस फिल्म में दीपिका दीपिका जैसी नहीं दिखेगी, चेहरे पर कोई तेज़ाब फैक दे तो क्या होता है ? क्या बस चेहरे झुलसता है, क्या चेहरे की खूबसूरती खत्म हो जाती है, क्या पीड़ित की पूरी जिंदगी बदल जाती है, क्या इसके बाद उसकी जिंदगी दुबरा पहले जैसी नहीं हो पाती, क्या पीड़ित का मनोबल इतना टूट जाता है की जीना भारी लगने लगता है।

अब तक किसी फिल्म ने हमें ऐसी कोई कहानी या कोई रोल नहीं दिखाया है। लेकिन अब जो छपाक फिल्म आरही है, वह इसी विषय पर आधारित है। फिल्म में दीपिका पादुकोन एसिड अटैक पीड़ित लड़की की भूमिका निभा रही है, फिल्म में दीपिका का नाम मालती है। मालती का किरदार असल जिंदगी में एसिड अटैक की शिकार हुई लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी है। लक्ष्मी की उम्र जब 16 साल की थी, जब उनका चेहरे को झुलसा दिया गया। केवल इसलिए की लक्ष्मी ने किसी के सादी का प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इसके चलते उनके साथ इतना दर्दनाक हत्शा हुआ।

अगर आपको न बताया जाए की यह दीपिका की तस्वीर है तो आप दीपिका को पहचान नहीं सकेंगे। इस लोक में सिर्फ एक फ्रेम है, जिसमे दीपिका एक ओर से झाक रही है शीशे में प्रतिबिंब (reflection) दिखाई दे रहा है। चेहरे पर झुर्रिया है। बिलकुल ऐसा जैसा एसिड अटैक के बाद होता है। लेकिन आखो में चमक है और एक हल्की सी मुस्कुराहट है। फिल्म एक संदेश देती है की चाहे हालात कितने भी खराब क्यों  हो जाये पर कुछ लोग अपना हौसला बनाये रखते है। समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाते है। वह जीना नहीं छोड़ते जिंदकी से मोहब्बत बनी रहती है। छपाक फिल्म 10 जनवरी 2020 को रिलीज़ होगी।

Image Source; USA Today

लक्ष्मी एक समाज सेविका है जो ऐसी पीड़ित महिलाओं के लिए आवाज़ उठाती है जिसके साथ  एसिड अटैक हुआ हो। ऐसी महिलाओ के हक़ के लिए लड़ती है। 2005 में जिसने लक्ष्मी पर हमला किया वह बहुत समय से उनका पीछा करता था और सादी के लिए कहता था लेकिन मना करने के बाद उस व्यक्ति ने लक्ष्मी पर  एसिड अटैक कर दिया जिसकी वजह से उनका पूरा चेहरा झुलस गया। भारत में ज्यादातर ऐसे  एसिड अटैक के पीछे इसी प्रकार की कहानी होती है। एसिड अटैक होने के बाद आस पास के लोगो का भी बर्ताव बुरा होता है

जिसकी वजह से अक्सर पीड़ित हार मान जाते है। 2017 में छपी US TODAY की रिपोर्ट में बताया गया की भारत में हर साल तकरीबन 250-300 एसिड अटैक होते है। इन एसिड अटैक में ज्यादातर महिलाएं और लड़किया शामिल होती है। 2016 में इसी प्रकार के 300 मामले सामने आए थे। यह सिर्फ सरकारी अकड़े है जो सामने आते है कुछ समाज की शर्म के कारण सामने नहीं आते। भारत सरकार ने 2016 में the right of persn disabilities bill में बदलाव किये गए। एसिड अटैक पीड़ितों को आरक्षण दिया जाने लगा और बहुत सुविधाएं दी गई। 2013 से पहले इस अपराध के लिए कोई सज़ा नहीं थी। लेकिन अब इस अपराध में 10 साल की कैद होगी।

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