Diwali / Deepawali 2019: दिवाली क्यों मनाई जाती है और इसके क्या महत्व है ?

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Why is Diwali celebrated in India and what is its significance? Why did Rama kill Ravana? What day will be celebrated in Diwali 2019, what can you special on Diwali
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Overview

  • भारत में ऐसे मनाई जाती है ? दिवाली / दीपावली
  • अयोध्या के राजा दशरथ की क्या भूमिका है।
  • राम ने किया रावण दहन

दिवाली क्यों मनाई जाती है? (Why is Diwali celebrated?) दिवाली भारत में मात्र एक ऐसा त्यौहार है जिसमें हम सैकड़ों दीपक जला कर अंधेरे को भगाने का एक पवित्र काम करते हैं। दिवाली आने पर घर दफ्तर और बड़े-बड़े ऑफिसों में एक साथ जुट कर दिवाली की सफाई करी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि दिवाली 5 दिनों का त्यौहार होता है, जो कि धनतेरस के महोत्सव से शुरू हो जाता है। बता दे की इस बार दिवाली 2019 का त्यौहार 27 अक्टूबर 2019 को मनाया जाएगा। इन पांचों दिनों में कैसे खुशी उल्लास के साथ हैं दिवाली मनाई जाती है, इसके बारे में नीचे बताया गया है।

  • धनतेरस (Dhanteras)
  • छोटी दीवाली (Choti Diwali)
  • दिवाली (Diwali)
  • गोवर्धन पूजा (govardhan puja)
  • भैया दूज (Bhaiya dooj)

भारत में ऐसे मनाई जाती है दिवाली / दीपावली

Diwali / Deepawali Celebration: हर साल दिवाली के कुछ दिन पहले, रसोई घर और पढ़ने के स्थान को अच्छे से साफ किया जाता है। वह इसलिए क्योंकि पूजा करने से हमें शांति मिलती है, अनाज खाने से ताकत और पढ़ाई करने से हमारा ज्ञान बढ़ता है। सफाई के साथ-साथ घर में स्वादिष्ट व्यंजन बनते हैं, और घर के सभी सदस्यों के लिए रंग बिरंगे कपड़े भी खरीदे जाते हैं।

अयोध्या के राजा दशरथ

Diwali in History: हर त्यौहार की तरह दिवाली मनाने के पीछे भी एके धार्मिक मान्यता है, जिसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। हजारों साल पहले अयोध्या में राजा दशरथ नाम के एक बहुत बड़े राजा थे। जो कि अपनी तीन बेटियों कौशल्या सुमित्रा और केकई और चार पुत्र राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न के साथ खुशी-खुशी जिंदगी व्यस्त कर रहे थे। ऐसा कहा जाता है कि राम चारों भाइयों में सबसे ज्यादा होशियार और तेज थे, इसीलिए महाराज दशरथ ने राम को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। यह बात रानी केकई से हजम नहीं हो रही थी, और उन्होंने राजा दशरथ को अपने दिए हुए 2 वचनों की याद दिला दी। केकई ने महाराज दशरथ से कहा कि वह राम को 14 साल के लिए वनवास भेजें और भरत को उत्तराधिकारी की गद्दी सौप दे।

राम का वनवास सफर

Lord Ram & Laxman: राम अपने पिता दशरथ के कहने पर अपनी बीवी सीता (Sita) और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ वनवास के लिए निकल पड़े। यह तीनों अपना राजपाट है और ऐशो आराम को छोड़कर वन में जाकर एक योगी की तरह रहने लगे। एक दिन सूर्पनखा नाम की एक राक्षस नी अपना भेष बदलकर जंगल में चली आती है। और प्रभु राम को देखते ही अपना दिल उन्हें दे बैठती है, इस पर राम जी बोलते हैं कि मैं तो शादीशुदा हूं तुम चाहो तो मेरे भाई लक्ष्मण से मिल सकती हो। लक्ष्मण भी सूर्पनखा के प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं। इस पर सूर्पनखा गुस्से के मारे लाल पीली हो जाती है, और सीता मैया पर टूट पड़ती है। गुस्से में आकर लक्ष्मण सूर्पनखा की नाक और कान काट देते हैं, और सूर्पनखा को अपनी आंखों के सामने से जाने के लिए कहते हैं। सूर्पनखा दर्द के मारे चीखते हुई अपने भाई रावण के पास पहुंचती है और उन्हें सब कुछ सही-सही बता देती है। रावण ने कहा कि मैं बलशाली हूं और अपनी बहन का बदला लेकर ही मानूंगा। रावण ने इसे अपमान का बदला लेने के लिए मेरीछह नाम के एक राक्षस की मदद ली और उसे हिरण के रूप में राम की कुटिया के पास भेज दिया। हिरण इतना सुंदर था राम और लक्ष्मण सीता भाभी के लिए हिरण पकड़ने के लिए जंगल की तरफ भागने लगे। इसी बीच रावण ने एक साधु का रूप धारण करके अपनी चालाकी से सीता को कुटिया से उठा लिया और एक उड़ने वाले वाहन में बैठकर सीता को अपनी लंका में ले गए।

राम ने किया रावण दहन

Rama Vs Ravana: राम और लक्ष्मण सीता मैया को ढूंढने के लिए जंगल में निकल पड़े, इसे बीच उन्हें जटायु नाम का एक पक्षी मिला जिस ने कहा कि दुष्ट रावण सीता को दक्षिण की तरफ ले गया है। इसके अलावा और राम लक्ष्मण को मदद के तौर पर वानरों की सेना भी मिली, जिसमें एक अद्भुत में वानर था हनुमान। हनुमान में अपनी द्रव्य शक्ति से एक विशाल समुद्र पार कर लिया और वह एक ऐसी लंका पहुंच गया जहां पर दुष्ट रावण ने सीता का हरड़ करके रखा था। हनुमान (Hanuman) ने पूरी आंखें देखी को श्री राम को बता दिया, और राम जी और उनकी सेना ने एक बड़ा सेतु तैयार करके लंका तक पहुंचने का रास्ता बना दिया। बस फिर क्या था राम जी की सेना ने राक्षसों को हरा दिया, और इसी लड़ाई में राम ने दुष्ट रावण (Ravan) का विनाश कर दिया। जब राम 14 साल के वनवास के बाद सीता मैया और लक्ष्मण के साथ सही सलामत अयोध्या पहुंचे तो, पूरे अयोध्या को सुंदर-सुंदर दिए और रंग बिरंगे फूलों से सजा दिया गया। बस फिर क्या था इस दिन को दिवाली का नाम दिया गया, और अब हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन दिवाली का त्यौहार बड़े ही उल्लास और सम्मान के साथ है मनाया जाता है। हर साल इसी दिन ठीक आयोध्या जैसे ही पूरे नगर को रंग बिरंगी लाइट और मन लुभा देने वाली मोमबत्तियों से पूरे नगर को सजा दिया जाता है। एक बार फिर से आपको दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं

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