भारत की Period End Of Sentence फिल्म को मिला ऑसकर अवार्ड। क्या था ऐसा इस फिल्म में ?

भारत की फिल्म ने आज ऑसकर अवार्ड जीता जिसका नाम Period. End Of Sentence है। यह फिल्म एक डोकुमेंटरी फिल्म थी। ऑस्कर अवार्ड में शार्ट फिल्म सांखला में कुल 9 फिल्मो को चुना गया था। जिसमे से एक भारत की यह फिल्म थी। समाज में पीरयड  टैबू पर बनी है ये फिल्म। इसी फिल्म ने इस साल शार्ट फिल्म ऑस्कर  अवार्ड जित लिया है। जो भारत के लिए गर्व की बात है। इस फिल्म की कुछ दिलचस्प बाते ,जानते है। यह कहानी है दिल्ली से कुछ 6 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के शहर के हापुड़ जिले की महिलाओं की। इन महिलाओ ने छोटे शहरो में पीरयड के खिलाफ एक आंदोलन चलाया था। यह डोकुमेंटरी उन महिलाओ की बात करती है।

जिन्हे अपने समय में सेनिटरी पैड नहीं मिले थे। न ही इसके बारे में उन्हें कुछ जानकारी थी न ही किसी ने उन्हें कुछ बताया। इससे  बहुत सी महिलाओ को बहुत सी बीमारिया हो रही थी। कभी उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ता, कभी हमेसा के लिए उन्हें पड़े छोड़नी पड़ जाती थी। इसके बाद उस जिले में सेनेटरी बनाने वाली एक मशीन लगा दी गई। इससे उनके जीवन में बहुत बदलाव हुआ। जिन महिलाओ को सेनेट्री पैड के बारे में पता नहीं था। अब उन्होंने इसका इस्तमाल करना शुरू करदिया है। वो भी अपने हातो से बना कर , इन पैड्स का इस्तामल वह खुद नहीं करती बल्कि इनको वह बेचती भी है।

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जिससे यह सुविधा और महिलाओ तक भी पहुंच  सके। और उनकी आय का भी सदन बन सके। इससे उन्हें रोजगार भी मिलता है। अक्षय कुमार की फिल्म पैड मैन भी इसी चीज पर आधारित थी। पैड मैन एक असली फिल्म पर आधारित थी। इस शार्ट फिल्म में सारा दयान महिलाओं  पर किया गया है की कैसे महिलाये पैड इस्तमाल करती है। बाकि इस फिल्म में हापुड़ की महिलाये ही काम करती दिखाई दे गी। इस 26  मिनट फिल्म का नाम है ,  Period. End Of Sentence इस फिल्म को अंग्रजी भाषा में बनाया गया है। इस फील का नाम का मूल सन्देश यह है की किसी की पढ़ाई खत्म नहीं होनी चाइये , बल्कि प्रियड  को खत्म करना चाइये। इस फिल्म को डेरेक्ट किया है ईरानी रायका झताब ने , भारत के लिए यह गर्व की बात है।

 

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