भगत सिंह को सरकार शहीद मानती है ? Know The “Dictionary Of Martyrs”

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शहीद एक ऐसा शब्द जिसे हालफिलाल में बहुत चर्चा हुई। मांग उठी की CRPF के लोगो को भी शहीद का दर्ज़ा मिले। तब सरकार ने बताया था की शहीद की परिभाषा सेना में इस्तेमाल नहीं होती। लेकिन भारत में सहादत भावना वाला मुद्दा है। कई बार अपने मीडिया रिपोर्ट्स पर ध्यान दिया होगा जिनमे पूछा जाता है की आज़ादी की लड़ाई में जान देने वाले नायको को वो आधारिक तोर पर शहीद मानते है या नहीं। इसी सवाल पर सरकार धुइँधा में पड़ जाती है। लेकिन अब एक अच्छी खबर है। भारत में Dictionary of Martyrs क़िताब बनाने का काम पूरा हो गया है। 7 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने dictionary of martyrs का आखरी खंड लॉन्च किया।

Dictionary of martyrs; का मतलब है, वह dictionary जिसमे सभी शहीदों का नाम है। ब्रिटिश हुकमत से भारत की आज़ादी की लड़ाई में लड़ने वाले सभी का नाम दर्ज़ है। इसे लिखने का काम इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च (ICHR) ने किया है। 1857 के विद्रो से लेकर 1947 तक आज़ादी तक जितने भी लोगो ने आज़ादी की लड़ाई में भाग लिया उनका नाम दर्ज़ है।

Dictionary Of Martyrs में क्या है, शहीदो की परिभाषा ?

इस किताब में शहीद शब्द का उपयोग उसके लिए किया गया, जो आज़ादी की लड़ाई में पकड़ा गया हो या मारा गया हो, या देश की आज़ादी के लिए सूली पर चड़ा दिए गए। इस डिक्शनरी में इंडियन नैशनल आर्मी और मिल्ट्री रह लोगो के नामो को भी शामिल किया गया है। जो ब्रिटिश हुकूमत से लड़ते हुए शहीद हुए। इस डिक्शनरी में 1857 के संग्राम के अलावा जलियावाला बाघ, असयोग आंदोलन  और भारत छोड़ो आंदोलन के शहीदों को शामिल किया गया है। इनके अलावा 1915 से लेकर 1934 तक चली क्रांति कारी आंदोलन के शहीदों को जगह दी गई है। ब्रिटिश हुकूमत में किसानो और आदिवासियों ने कई आंदोलन किये थे। इन्हे भी डिक्शनरी में शामिल किया गया है।

 

Dictionary Of Martyrs में कितने नाम है ?

इस किताब को पांच खंडो में बाटा गया है। जिसमे 13,500  शहीदों का ब्यौरा है। इन सभी पांच खंडो को इलाके के हिसाब से बाटा गया है। पहले खंड के दो हिस्से है, इस खंड में 4400 शहीदों का ब्यौरा दिया है। यह सभी शहीद दिल्ली, हरीयाणा, पंजाब, हिमाचल से थे। दूसरे हिस्से में 3500 शहीदो की जानकारी दी गई है। इसमें  यूपी, उत्तरांखंड, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, राजस्थान, जम्मू कश्मीर को शामिल किया गया है। तीसरे खंड में 1400 शहीदों की जानकारी दी गई है। यह सभी महाराष्ट्र, गुजरात, सिंध के रहने वाले थे। चौथे खंड में नार्थ-ईस्ट, बंगाल, झारखंड, ओडिशा के 3300 शहीदों के नाम है। पाचवे और आखरी खंड में 1450 शहीदों की जानकारी दी गई है। इसमें दक्षिण भारत के राज्यों को शामिल किया गया है।

कैसे बनाई गई यह डिक्शनरी ? 

इस डिक्शनरी को बनाने के लिए पहले 1857 संग्राम में शहीद हुए तकरीबन 14000 शहीदों की पहचान की गई। सभी चीजों को बड़ी बारीकी से जाची गई है, और फर नाम दर्ज़ किये गए है। इसको बनाने की सुरवात 2009 में हुई थी। भारत में कुछ किताबो में भगत सिंह, और उनके साथियो को उग्रवादियों का दर्ज़ा दिया गया था। 2017 में इस बात पर बहुत बहस हुई थी और सरकार से पूछा गया था।  की सरकार भगत सिंह को किस नज़रिये से देखती है।  सरकार उग्रवादी नहीं मानती लेकिन इसपर कुछ ज्यादा स्पष्ट नहीं हो जाया था। 2018 नवम्बर में केंद्रीय सुचना आयोग ने ग्रह मंत्रालय को चिठ्ठी लिख कर जानकारी मांगी, की भगत सिंह जी और उनके साथियो को शहीद का दर्ज़ा दिया जा सकता है, और नहीं दिया जा सकता तो सरकार कारण दे। की ऐसा क्यों नहीं हो सकता और ग्रह मंत्रालय ने जवाब भी दिया। और कहा गया की ग्रह मंत्रालय ऐसी सूचि नहीं रखता।

 

यह मामला नेशनल आर्काइव को भेज दिया गया। एक रिपोर्ट से सामने आया है। की नई पांच डिक्शनरी में PN Chopra की डिक्शनरी की तरह भगत सिंह जी और उनके साथियो को शहीद माना गया है। इस क्शनरी में उग्रवादी और आतंकवादी जैसे शब्दों का बिलकुल इस्तामल नहीं किया गया है। भगत सिंह पर काफी रिसर्च करचुके प्रोफेसर चमन लाल कहते है, देश में नेताओ ने शहीदों का नाम जनता को खुस करने के लिए किया है। भगत सिंह जी की लड़ाई सिर्फ अंग्रज़ो से नहीं थी, वह ज़मीदारो से भी लड़ रह थे। ऐसे शहीदों के नाम की अफवाह उड़ा कर सब अपना अपना फायदा देखते है। यह डिक्शनरी आने वाली युवा पीढ़ी के लिए नयाब दस्ता वेज़ है। जो सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

 

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