Rath Yatra 2021 | Jagannath Puri Rath Yatra 2021 | जानें इस यात्रा की धार्मिक और पौराणिक महिमा

Rath Yatra 2021: Jagannath Puri Rath Yatra 2021 कोरोना काल में शुरू हुई जगन्नाथ रथ यात्रा

Rath Yatra 2021
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Rath Yatra 2021Jagannath Puri Rath Yatra 2021– 12 जुलाई यानी के आज के दिन सोमवार को जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जा रही है. कोरोना काल में कड़ी पाबंदियों के बीच ओडिशा के पुरी और गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकल रही है. अहमदाबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार सुबह मंगला आरती में भी हिस्सा लिया.

कोरोना काल के चलते सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार रथ यात्रा केवल पूरी में सिमित दायरे में निकाली जाएगी. कोर्ट ने कोरोना के डेल्टा प्लस वेरियंट और तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए ओडिशा सरकार के फेसले को सही टहराते हुए पुरे राज्य में रथ यात्रा को निकालने पर पाबंधी लगा दी है.

Rath Yatra 2021
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देशवासियों को भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की शुभकामनाएं दी. उन्होंने कहा कि ‘रथ यात्रा के विशेष अवसर पर सभी को बधाई. हम भगवान जगन्नाथ को नमन करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि उनका आशीर्वाद सभी के जीवन में अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि लाए. जय जगन्नाथ!’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की शुभकामनाएं दी. उन्होंने लिखा ‘श्री जगन्नाथ रथ यात्रा की आप सभी को शुभकामनाएं.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इसी दोरान अहमदाबाद में ही है, अमित शाह ने सोमवार सुबह मंगला आरती में हिस्सा लिया. सुबह चार बजे हुई आरती में अमित शाह अपने परिवार के साथ हिस्सा लेने पहुचे यहाँ उन्होंने भगवान् जगन्नाथ की पूजा की.

हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ही भव्य उत्साह के साथ जगन्नाथ रथ यात्रा निकाले जाने का विधान है. इस वर्ष 2021 में यह पावन यात्रा 12 जुलाई, सोमवार से आरंभ होगी और इसका समापन 20 जुलाई, मंगलवार को देवशयनी एकादशी के पर्व के साथ ही पूरे विधि-विधान अनुसार किया जाएगा.

जगन्नाथ रथयात्रा का महत्व.

हिन्दू धर्म में जगन्नाथ रथ यात्रा का बहुत बड़ा महत्व है. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को जगन्नाथ रथ यात्रा निकली जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथयात्रा निकालकर भगवान् जगन्नाथ को पर्सिद गुंडीचा माता के मंदिर पहुचाया जाता है. जहा भगवान् सात दिनों तक विश्राम करते है. इसके बाद भगवान् जगन्नाथ की वापसी की यात्रा सुरु होती है. भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा पूरे भारत में एक त्योहार की तरह मनाई जाती है.

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